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Kuladevata

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[1]कुलदेवी बन्नी माता

बिहार राज्य कि लोक प्रसिद्द कुलदेवी बन्नी माता । जिनका मंदिर हिमाचल प्रदेश और दक्षिण भारत कर्नाटका और राजस्थान में है। बन्नी माता महाकाली स्वरूपा है। बन्नी माता की उत्पति उस समय की है। जब शुंभ निशुंभ राक्षसों के अंत के लिए माता पार्वती ने कौशिकी देवी को प्रकट किया तब माता पार्वती का अंग और तेज श्याम वर्ण का होगया । और उसी समय से माता पार्वती माहाकाली नाम से विख्यात हुई । तब माहाकाली हिमालय के घने वन में जाकर स्थित हुई । वनों में रहने वाली महाकाली बन्नी नाम से प्रसिद्ध हुई । बन्नी माता के सात स्वरूप है। और उन सात स्वरूपों के नाम इस प्रकार हैं।

(1)बन्नी माता- वनों में रेहने वाली वन कि अधिष्ठात्री देवी

(2) दुर्गा - आदिशक्ति मूल प्रकृति दुर्गति-नाशिनी दुर्गम से दुर्गम पीड़ा का नाश करने वाली

(3)माहा काली- धर्म, कि रक्षा, अधर्म का संहार करने वाली

(4)माहा लक्ष्मी- एश्वर्य कि देवी धन ,वैवभ श्री प्रदान करने वाली

(5)माहा सरस्वती- ज्ञान विद्या, बुद्धि का प्रतीक अज्ञानता दूर करने वाली

(6) ललिता - सम्पूर्ण ब्रह्मांड कि सर्वोच्च शक्ति परम चेतना (सच्चिदानंद):अत्यंत सुंदर", "दिव्य लीला करने वाली" "आनंदमयी"

(7)कुमारी माता- ब्रह्मचर्य , वैराग्य साहस बल, और शौर्य का प्रतीक

बन्नी माता का मंत्र : ॐ ह्रिं क्रिं कुलपूज्याम बन्नी परमेश्वर्यै नमः

दूसरा मंत्र: ॐ ह्रिं क्रिं बन्नी महाकालीकै नमः

तीसरा मंत्र: ॐ शुभदाम वरदाम क्रिं बन्नी महाकाली परमेश्वरीयै नमः

बन्नी माता के दो भैरव है- काल भैरव और बटुक भैरव इन दोनों भैरव मैसे एक भैरव माता सेवा में हमेशा उपस्थित रहते हैं ।[2]

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  2. बन्नी माता